Salary New Rules :  29 कानून खत्म कर नए लेबर युग की शुरुआत, अब नौकरी नहीं, पूरा वर्क सिस्टम बदलेगा

Salary New Rules :  29 कानून खत्म कर नए लेबर युग की शुरुआत, अब नौकरी नहीं, पूरा वर्क सिस्टम बदलेगा

राजधानी चौपाल, चंडीगढ़। 
Salary New Rules : केंद्र सरकार ने देश के श्रम ढांचे में सबसे बड़ा बदलाव करते हुए चारों नए लेबर कोड लागू करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। 8 और 9 मई 2026 को जारी 30 से अधिक गजट नोटिफिकेशन के जरिए केंद्र ने उन नियमों को अधिसूचित कर दिया है, जिनके बाद देश में दशकों पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह नया श्रम ढांचा लागू होगा। 

सरकार ने इन कोड्स को लागू करने के लिए 21 नवंबर 2025 की तारीख तय की थी, लेकिन अब नियमों के अंतिम रूप में आने के बाद इनके प्रभावी अमल का रास्ता साफ हो गया है। नए लेबर कोड का सीधा असर करोड़ों कर्मचारियों, फैक्ट्री मजदूरों, प्राइवेट सेक्टर वर्कर्स, गिग वर्कर्स और कंपनियों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के काम के घंटे, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, यूनियन अधिकार और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। सामान्य परिस्थितियों में रोजाना आठ घंटे का कार्यदिवस तय किया गया है। हालांकि कंपनियों को काम के घंटे तय करने में कुछ लचीलापन दिया गया है, लेकिन कुल साप्ताहिक सीमा 48 घंटे ही रहेगी। इसके साथ ही हर कर्मचारी को वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा ताकि वेतन भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे।

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Salary New Rules : ये है नए लेबर कोड का अहम पहलू

नए लेबर कोड का सबसे अहम पहलू यह माना जा रहा है कि अब केंद्र सरकार “फ्लोर वेज” यानी न्यूनतम आधार वेतन तय करेगी। राज्यों को इससे कम न्यूनतम मजदूरी तय करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों की जीवनशैली, आवास खर्च, कपड़ों और अन्य आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग फ्लोर वेज तय कर सकती है। माना जा रहा है कि इससे देशभर में मजदूरी व्यवस्था को एक समान आधार मिलेगा, हालांकि उद्योगों और राज्यों के बीच इसे लेकर बहस तेज हो सकती है।

हालांकि अंतिम नियमों में एक ऐसा बदलाव किया गया है जिसने मजदूर संगठनों और श्रम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ड्राफ्ट नियमों में न्यूनतम मजदूरी तय करने का जो विस्तृत फॉर्मूला शामिल था, उसे अंतिम अधिसूचना से हटा दिया गया है। पहले प्रस्तावित व्यवस्था में मजदूर परिवार की मूल जरूरतों को आधार बनाकर वेतन तय करने की बात थी। इसमें प्रतिदिन 2700 कैलोरी पोषण, चार सदस्यीय परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़ा, किराया, ईंधन, बिजली, शिक्षा, इलाज और आकस्मिक खर्चों को शामिल किया गया था। यह मॉडल सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक ‘रेप्टाकोस ब्रेट’ फैसले और भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों पर आधारित माना जाता था।

Salary New Rules : अलग-अलग जारी नहीं होंगे आदेश

अब सरकार ने संकेत दिया है कि न्यूनतम मजदूरी तय करने के मानदंड अलग-अलग आदेशों के जरिए जारी किए जाएंगे। श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्यों के बीच मजदूरी में असमानता बढ़ सकती है और कंपनियों को कम वेतन तय करने की गुंजाइश मिल सकती है। खासकर असंगठित क्षेत्र और ठेका श्रमिकों पर इसका असर अधिक पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

नए श्रम ढांचे में गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को पहली बार बड़े स्तर पर सामाजिक सुरक्षा देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। सरकार सामाजिक सुरक्षा फंड बनाने जा रही है, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिलीवरी, कैब सेवा और अस्थायी रोजगार से जुड़े श्रमिकों को लाभ मिल सकेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकारें भी इसी तर्ज पर अपने नियम तैयार करेंगी।

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Salary New Rules : डेली वेजिज वाले कर्मियों के लिए भी लागू होंगे नियम

रोजाना वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए भी नए नियम लागू होंगे। उनके लिए आठ घंटे का कार्यदिवस तय किया गया है, जबकि वैकल्पिक शिफ्ट या विशेष कार्य व्यवस्था वाले कर्मचारियों के शेड्यूल को इस तरह डिजाइन करना होगा कि साप्ताहिक 48 घंटे की सीमा का उल्लंघन न हो। कार्यस्थल पर सुरक्षा, आराम और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों को ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड’ के तहत लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए लेबर कोड भारत के औद्योगिक और रोजगार ढांचे को पूरी तरह बदल सकते हैं। सरकार इसे श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि ट्रेड यूनियनें आशंका जता रही हैं कि इससे मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत कमजोर हो सकती है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि नया श्रम कानून कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आता है या उद्योगों को ज्यादा छूट देने वाला ढांचा साबित होता है। 

Rahul Hindustani

Rahul Hindustani

राहुल हिंदुस्तानी हरियाणा की पत्रकारिता में सक्रिय एक निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़े पत्रकार हैं। वे साप्ताहिक समाचार पत्र “राजधानी चौपाल” के संपादक एवं स्वामी हैं, जिसके माध्यम से वे आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। हरियाणा के विभिन्न जिलों में सक्रिय राहुल हिंदुस्तानी जमीनी मुद्दों, प्रशासनिक मामलों और राजनीतिक गतिविधियों पर सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्रकारिता की पहचान है—तथ्य आधारित खबरें, बेबाक अंदाज और जनहित को प्राथमिकता। “राजधानी चौपाल” आज एक भरोसेमंद उभरता हुआ मंच बन चुका है, जो स्थानीय खबरों को तेजी और विश्वसनीयता के साथ लोगों तक पहुँचाता है।

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